परंपरा का संगम: लोकगीतों की गूंज और सोलह श्रृंगार, क्षेत्र में गणगौर पर्व की दिखी अनूठी छटा

Kanwas News/सांगोद. गणगौर का पर्व शनिवार को सांगोद क्षेत्र में श्रद्धा, उमंग और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर महिलाओं और नवविवाहित युवतियों ने पूरे पारंपरिक श्रृंगार के साथ पूजा-अर्चना की। सुबह से ही महिलाएं सोलह श्रृंगार कर घरों से निकलीं और गाजे-बाजे के साथ ईसर गणगौर की शोभायात्रा के साथ मंदिरों में पहुंचीं। मंदिरों में पूजा-अर्चना का क्रम दिनभर जारी रहा। गणगौर पर्व को लेकर तैयारियां एक दिन पूर्व से ही शुरू हो गई थीं। बाजारों में खरीदारी को लेकर जबरदस्त रौनक देखने को मिली। सुबह से शाम तक शहर के बाजारों में अच्छी खासी भीड़ बनी रही।

शाम होते ही पूजन कार्यक्रम ने और भी भव्य रूप ले लिया। गाजे-बाजे के साथ महिलाएं देर रात तक बारी-बारी से मंदिरों में पहुंचकर गणगौर पूजन करती रहीं। नगर के प्रमुख स्थानों जैसे मैन बाजार, सब्जी मंडी रोड, गांधी चौराहा, बपावर मार्ग, कोटा मार्ग और कुंदनपुर रोड पर स्थित मंदिरों में विशेष सजावट की गई। आकर्षक डेकोरेशन और रोशनी ने पूरे माहौल को और भी उत्सवमय बना दिया। गणगौर पर्व ने सांगोद में पारंपरिक संस्कृति और महिलाओं की आस्था का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत किया, जहां हर ओर उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला।

(न्यूज- बीएम राठौर)

कनवास. कस्बे में सुहाग पर्व गणगौर शनिवार को श्रद्धा, उमंग और उत्साह के साथ मनाया गया। इस दौरान महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। गणगौर पर्व के अवसर पर कनवास कस्बे की महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मंदिरों में पूजा-अर्चना की। सुबह से ही महिलाएं सज-धज कर गणगौर माता की पूजा के लिए मंदिरों में पहुंचीं। महिलाओं ने सोलह श्रृंगार कर विधि-विधान से गणगौर माता की आराधना की और अपने परिवार की सुख-समृद्धि व अखंड सौभाग्य की कामना की। इस दौरान पारंपरिक लोकगीतों की गूंज से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।

(न्यूज- रवि राठौर/कनवास)

देवली मांजी. सहित आसपास के गांवों में सुहाग पर्व गणगौर हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर महिलाओं और युवतियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। पर्व की तैयारियां महिलाओं ने चार दिन पहले से ही शुरू कर दी थीं। विनायक स्थापना के साथ ही गणगौर के बासन, चाक पूजन और खाना-गार जैसी परंपराओं का विधिवत निर्वहन किया गया। पूर्व संध्या पर महिलाओं ने मेहंदी रचाई और घरों में पकवान, गुणे-गुंजा आदि बनाए। बाजारों में भी पूजन सामग्री और श्रृंगार की वस्तुओं की खरीदारी को लेकर खासा उत्साह रहा। गणगौर के दिन सुहागन महिलाओं ने व्रत रखकर सोलह श्रृंगार किया और शाम को पुराने बस स्टैंड स्थित बांकेबिहारी मंदिर में सामूहिक रूप से एकत्रित हुईं। यहां महिलाओं ने बेसन से बने आभूषणों से गणगौर माता का श्रृंगार कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और विभिन्न पकवानों का भोग लगाया।

पूजा के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक गीत गाते हुए परिवार की सुख-समृद्धि और पति की दीर्घायु की कामना की। “गारा की गणगौर कुआ पर क्यों खड़ी…” और “रानी पूजे राजा ने…” जैसे लोकगीतों से माहौल भक्तिमय हो उठा। इससे पहले कुंवारी कन्याओं ने 16 दिनों तक प्रातःकाल आक-धतूरे की पत्तियां लाकर ईसर-पार्वती की पूजा की और अच्छे वर की कामना की। शाम के समय सभी महिलाएं शिव मंदिर में एकत्रित हुईं, जहां से बैंड-बाजों के साथ जल यात्रा निकाली गई। यह यात्रा विभिन्न मार्गों से होती हुई मंदिर पहुंची, जहां गणगौर माता को जल अर्पित किया गया। रात्रि में “टूट्या” कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें हास्य-व्यंग्य के माध्यम से सभी को खूब गुदगुदाया गया और पर्व का समापन उल्लासपूर्ण माहौल में हुआ।

(न्यूज- कामेश जंगम)

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Author: Kanwas News

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