शहीद, डाकू और फकीर के स्वांगों से गूंजा सांगोद, निकली बारह भाले की सवारी

Kanwas News/सांगोद. न्हाण लोकउत्सव 2026 के तहत गुरुवार को लोकगीतों और पारंपरिक स्वांगों के बीच बारह भाले की सवारी निकाली गई। शाम करीब 5 बजे चौधरी पाड़ा स्थित ब्रह्माणी माता मंदिर के सामने नन्हे-मुन्ने उमराव और विभिन्न स्वांगों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना के बाद बारह भाले की सवारी रवाना हुई। यह सवारी खेलदारान मोहल्ला, सेठों का चौक और मुख्य बाजार सहित विभिन्न मार्गों से होकर गुजरी। सवारी को देखने के लिए रास्तों, मकानों की छतों और मुंडेरों पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। बारह भाले की सवारी में दोपहर 12 बजे से ही विभिन्न स्वांगों के आने का क्रम शुरू हो गया था। कलाकारों ने फकीर बाबा, डाकू, डायन, सेठ-सेठानी, साटिया-साटिन, मछुआरे और क्रिकेटर सहित कई अलग-अलग रूप धारण कर लोगों का मनोरंजन किया। शहीदों पर आधारित स्वांग भी प्रस्तुत किया गया, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बना। इसके अलावा डाकुओं का स्वांग और किन्नरों की प्रस्तुति को देखने के लिए भी बड़ी भीड़ उमड़ी। रातभर चलता है न्हाण का रंगमंच- न्हाण उत्सव को केवल तमाशा नहीं, बल्कि पुरखों की अमर धरोहर माना जाता है। लगभग पांच सौ वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को सांगोद में हर वर्ष जीवंत रूप में देखा जाता है। बारह भाले की सवारी के बाद भी कलाकार दिनभर की थकान भूलकर रातभर खुले मंच पर अपने स्वांग और प्रस्तुतियां देते हैं।रात्रिकालीन न्हाण में चाचा बोहरा, मदारी, मौसाला और चाचा बोहरा का ब्याह जैसी पारंपरिक प्रस्तुतियां आज भी लोगों का भरपूर मनोरंजन करती हैं और न्हाण उत्सव की अहम कड़ी मानी जाती हैं।

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Author: Kanwas News

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