Kanwas News/सांगोद. क्षेत्र में कांग्रेस के टिकट वितरण को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष के स्वर तेज होने लगे हैं। पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष एवं पंचायत समिति सदस्य रह चुकी पूजा सिंह कमोलर का टिकट कटने के बाद स्थानीय राजनीति में हलचल बढ़ गई है। टिकट वितरण से नाराज कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच संगठन के फैसले को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। क्षेत्र में पूर्व मंत्री स्वर्गीय भरत सिंह कुंदनपुर से जुड़े समर्थकों को टिकट नहीं मिलने को लेकर भी नाराजगी सामने आ रही है। नाराज कार्यकर्ताओं का आरोप है कि टिकट वितरण के दौरान स्थानीय नेताओं, पूर्व पदाधिकारियों और लंबे समय से संगठन के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं की राय को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। उनका मानना है कि इससे पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं में निराशा बढ़ सकती है।
जिला नेतृत्व पर अनदेखी के आरोप- टिकट वितरण को लेकर नाराजगी जता रहे कार्यकर्ताओं का कहना है कि चुनाव में लंबे समय से पार्टी के लिए सक्रिय रहने वाले स्थानीय चेहरों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी। उनके अनुसार, स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की भावनाओं और दावेदारों की राजनीतिक सक्रियता को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाता, तो असंतोष की स्थिति से बचा जा सकता था। कार्यकर्ताओं ने आशंका जताई कि यदि समय रहते नाराजगी दूर नहीं की गई और असंतुष्ट नेताओं व कार्यकर्ताओं को विश्वास में नहीं लिया गया, तो इसका असर आगामी चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
इन प्रमुख नामों के टिकट कटने से चर्चा तेज- पूजा सिंह कमोलर,कुशलपाल सिंह पानाहेड़ा,शुभम गौचर,विजयप्रताप सिंह पानाहेड़ा,अरविंद सिंह बृजलिया,नीलिमा सोनी
इन नामों को लेकर स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा जारी है। टिकट नहीं मिलने से नाराज दावेदारों और उनके समर्थकों की अगली रणनीति पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
पिछले चुनावों का हवाला देकर जताई चिंता- नाराज कार्यकर्ताओं ने पिछले नगरपालिका चुनावों का हवाला देते हुए संगठनात्मक तालमेल की कमी पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पहले भी आपसी समन्वय और संगठनात्मक निर्णयों को लेकर उठे सवालों का पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा था। ऐसे में टिकट वितरण के बाद पैदा हुई स्थिति ने सांगोद सहित कोटा ग्रामीण की राजनीति में चर्चाओं को फिर तेज कर दिया है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, चुनाव के दौरान टिकट वितरण के बाद पैदा होने वाला असंतोष किसी भी राजनीतिक दल के लिए चुनौती बन सकता है। खासकर तब, जब टिकट के दावेदारों के साथ उनके समर्थकों का भी स्थानीय स्तर पर प्रभाव हो। ऐसे में नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित करना तथा संगठन में समन्वय बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।


